लेखांकन जगत में मानव शक्ति के मूल्यांकन एवं लेखों में दर्ज कर वित्तीय परिणामों को प्रदर्शित करने के एक नयी प्रणाली विकसित होने लगी है जिसे मानव संसाधन लेखांकन (Human Resource Accounting ) कहा जाता है।
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सरकारी लेखांकन (Government Accounting ) क्या है ?
केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय सरकार जो लेखांकन पद्धति अपनाती हैं, उसे सरकारी लेखांकन कहा जाता है।
लेखांकन विज्ञान है अथवा कला ?
लेखांकन व्यवसाय के लेखे एवं घटनाओं को, मुद्रा में प्रभावपूर्ण विधि से लिखने, वर्गीकृत करने और सारांश में व्यक्त करने एवं उनके परिणामों की व्याख्या करने की कला है।
लेखांकन एक विज्ञान है क्योंकि इसमें विषय-वस्तु का क्रमबद्ध तथा व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। लेखांकन के अपने सिद्धांत व नियम हैं।
अतः लेखांकन एक विज्ञान है और साथ ही साथ यह एक कला भी है।
Mortgage Loan क्या है ?
सम्पत्ति के बंधक के बदले लिए गए कर्ज को Mortgage Loan (बंधक ऋण )कहा जाता है। बंधक एक ऋण है जिसमें संपत्ति या अचल संपत्ति को संपार्श्विक के रूप में उपयोग किया जाता है। उधारकर्ता ऋणदाता (आमतौर पर एक बैंक) के साथ एक समझौते में प्रवेश करता है जिसमें उधारकर्ता को नकद अग्रिम प्राप्त होता है, फिर वह एक निर्धारित समय अवधि पर भुगतान करता है जब तक वह पूरी तरह से ऋणदाता को वापस भुगतान नहीं करता है।
बंधक (Mortgage)कानूनी रूप से बाध्यकारी है और उधारकर्ता को नोट की शर्तों पर चूक होने पर उधारकर्ता के घर के खिलाफ कानूनी दावा करने का अधिकार देने में नोट सुरक्षित करता है।
बंधक आमतौर पर मासिक भुगतान के रूप में भुगतान किया जाता है जिसमें ब्याज और सिद्धांत शामिल होते हैं। प्रिंसिपल उधार ली गई मूल राशि का पुनर्भुगतान है, जो शेष को कम करता है। दूसरी ओर, ब्याज पिछले महीने के लिए मूल राशि उधार लेने की लागत है।
Good Will क्या है ?
अतिरिक्त लाभ अर्जित करने को Good Will कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में हम यू भी कह सकते है कि वह युक्ति जिसके द्वारा व्यवसायी अधिक लाभ अर्जित करने में सफल होता है उसे Good Will (ख्याति )कहा जाता है।
Prepaid Expense क्या है ?
जो खर्च पहले ही चूका दिया जाता है उसे Prepaid Expense(पूर्वदत्त व्यय ) कहा जाता है।
आगम (Revenue) क्या है ?
आगम से आशय व्यवसाय की आय से है। इसका अभिप्राय नियमित रूप से प्राप्त होने वाली आय या आवर्ती प्रकृति की आय से भी है। आगम से पूँजी में अभिवृद्धि होती है।
आगम का उदाहरण
माल के विक्रय से प्राप्तियाँ, अर्जित ब्याज, अर्जित कमीशन, अर्जित किराया, अर्जित लाभांश, अर्जित बट्टा, आदि।
Goods क्या है ?
जिन वस्तुओं का कोई व्यापारी व्यापर करता है, वह उसका माल (Goods) कहलाता है, जैसे - यदि कोई व्यापारी गेहूँ का व्यापर करता है तो गेहूँ उसका माल कहलाएगा।
यदि फर्नीचर का व्यापार करता है तो फर्नीचर उसका माल कहलाएगा।
तो हम इसे ऐसे भी कह सकते है कि जब किसी वस्तु का निर्माण या क्रय, बिक्री करने के उद्देश्य से होता है तो वह माल कही जाती है।
खर्च (Expenditure) क्या है ?
सम्पत्ति, माल अथवा सेवाएँ प्राप्त करने के लिए किया गया कोई भी भूटान अथवा सम्पत्ति का हस्तान्तरण खर्च कहलाता है।
खर्च के प्रकार
खर्च दो प्रकार के होते हैं :-
- पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure)स्थायी सम्पत्तियों के क्रय अथवा उनके मूल्य में वृद्धि करने के उद्देश्य से किया गया गैर-आवर्ती व्यय पूँजीगत खर्च कहलाता है।उदाहरणभूमि, भवन, मशीन, उपस्कर, आदि क्रय करने अथवा इसके निर्माण हेतु किया गया व्यय पूँजीगत व्यय है। पूँजीगत व्यय दीर्घकालीन लाभ प्रदान करता है।
- आयगत व्यय (Revenue Expenditure)आयगत व्यय वह व्यय है जो आवर्ती प्रकृति का होता है और उसका लाभ एक लेखांकन अवधि में ही प्राप्त हो जाती है। सभी आगत खर्चों को व्यापारिक एवं लाभ-हानि खाते में डेबिट किया जाता है। आयगत खर्च वर्तमान लाभोपार्जन क्षमता बनाए रखने में सहायक होते हैं।
लेनदार (Creditor) क्या है ?
जिस व्यक्ति, संस्था, फर्म, कम्पनी या निगम, आदि को उधार क्रय के लिए या ऋण के लिए व्यापारी द्वारा धन देय होता है, वे व्यापारी के लेनदार कहे जाते हैं।
सम्पत्तियाँ (Assets) क्या है ?
सम्पत्तियाँ से आशय उद्यम के आर्थिक स्त्रोत से है जिन्हें मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता है, जिनका मूल्य होता है और जिनका उपयोग व्यापर के संचालन व आय अर्जन के लिए किया जाता है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सम्पत्तियाँ वे स्त्रोत्र हैं जो भविष्य में लाभ पहुँचाते हैं।
उदाहरण के लिए, मशीन, भूमि, भवन, ट्रक, आदि।
इस तरह सम्पत्तियाँ व्यवसाय के मूलयवान साधन हैं जिन पर व्यवसाय का स्वामित्व है तथा जिन्हें मुद्रा में मापी जाने वाली लागत पर प्राप्त किया गया है।
सम्पत्तियों के निम्नलिखित प्रकार है :-
- स्थायी सम्पत्तियाँ (Fixed Assets)स्थायी सम्पत्तियों से आशय उन सम्पत्तियों से है जो व्यवसाय में दीर्घकाल तक रखी जाने वाली होती हैं और जो पुनः विक्रय के लिए नहीं हैं।उदाहरण - भूमि, भवन, मशीन, उपस्कर आदि।
- चालु सम्पत्तियाँ (Current Assets)चालु सम्पत्तियाँ से आशय उन सम्पत्तियों से है जो व्यवसाय में पुनः विक्रय के लिए या अल्पावधि में रोकड़ में परिवर्तित करने के लिए रखी जाती हैं। इसलिए इन्हें चालू सम्पत्तियाँ, चक्रीय सम्पत्तियाँ और परिवर्तनशील सम्पत्तियाँ भी कहा जाता है।उदाहरण :देनदार, पूर्वदत्त व्यय, स्टॉक, प्राप्य बिल, आदि।
- अमूर्त सम्पत्तियाँ (Intangible Assets)अमूर्त सम्पत्तियाँ वे सम्पत्तियाँ हैं जिनका भौतिक अस्तित्व नहीं होता है, किन्तु मौद्रिक मूल्य होता है।उदाहरण - ख्याति, ट्रेड मार्क, पेटेण्ट्स, इत्यादि।
- मूर्त सम्पत्तियाँ (Tangible Assets)मूर्त सम्पत्तियाँ वे सम्पत्तियाँ हैं जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता हो अर्थात जिनका भौतिक अस्तित्व हो।उदाहरण -भूमि, भवन, मशीन, संयंत्र, उपस्कर, स्टॉक, आदि।
- क्षयशील सम्पत्तियाँ (Wasting Assets)क्षयशील सम्पत्तियाँ वे सम्पत्तियाँ हैं जो प्रयोग या उपभोग के कारण घटती जाती हैं या नष्ट हो जाती हैं।उदाहरण -खानें, तेल के कुँए, आदि।
उद्देश्य के आधार पर लेखांकन के प्रकार क्या है ?
विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अलग-अलग प्रकार की लेखांकन पद्धतियाँ विकसित हुई हैं। इन्हें लेखांकन के प्रकार कहा जाता है।
उद्देश्य के आधार पर लेखांकन के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं :
- वित्तीय लेखांकन (Financial Accounting) : वित्तीय लेखांकन वह लेखांकन है जिसके अंतर्गत वित्तीय प्रकृति वाले सौदों को लेखाबद्ध किया जाता है। इन्हें सामन्य लेखाकर्म भी कहते हैं और इन लेखों के आधार पर लाभ-हानि या आय विवरण तथा चिट्ठा तैयार किया जाता है।
- लागत लेखांकन (Cost Accounting) : लागत लेखांकन वित्तीय लेखा पद्धति की सहायक है। लागत लेखांकन किसी वस्तु या सेवा की लागत का व्यवस्थित व वैज्ञानिक विधि से लेखा करने की प्रणाली है। इसके द्वारा वस्तु या सेवा की कुल लागत तथा प्रति इकाई लागत का सही अनुमान लगाया जा सकता है। इसके द्वारा लागत पर नियंत्रण भी किया जाता है। यह उत्पादन, विक्रय एवं वितरण की लागत भी बताता है।
- प्रबंध लेखांकन (Management Accounting) : यह लेखांकन की आधुनिक कड़ी है। जब कोई लेखा विधि प्रबंध की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करती है, तब इसे प्रबंधकीय लेखाविधि कहा जाता है।
लेखांकन के कार्य क्या है ?
लेखांकन के छः कार्य निम्नलिखित है :
- लेखात्मक कार्य (Recordative Function) :लेखांकन का यह आधारभूत कार्य है। इस कार्य के अन्तर्गत व्यवसाय की प्रारम्भिक पुस्तकों में क्रमबद्ध लेखे करना, उनकों उपयुक्त खातों में वर्गीकृत करना अर्थात उनसे खाते तैयार करना और तलपट बनाने के कार्य शामिल हैं।
- व्याख्यात्मक कार्य (Interpretative Function) :इस कार्य के अंतगर्त लेखांकन सूचनाओं में हित रखने वाले पक्षों के लिए वित्तीय विवरण व प्रतिवेदन का विश्लेषण एवं व्याख्या शामिल है। तृतीय पक्ष एवं प्रबंधकों की दृष्टि से लेखांकन का यह कार्य महत्वपूर्ण माना गया है।
- संप्रेषणात्मक कार्य (Communicating Function) :लेखांकन को व्यवसाय की भाषा कहा जाता है। जिस प्रकार भाषा का मुख्य उद्देश्य सम्प्रेषण के साधन के रूप में कार्य करना है क्योंकि विचारों की अभिव्यक्ति भाषा ही करती है, ठीक उसी प्रकार लेखांकन व्यवसाय के वित्तीय स्थिति व अन्य सूचनाएँ उन सभी पक्षकारों को प्रदान करता है जिनके लिए ये आवश्यक हैं।
- वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना (Meeting Legal Needs) :विभिन्न कानूनों जैसे - कम्पनी, अधिनियम, आयकर अधिनियम, बिक्री कर अधिनियम, आदि द्वारा विभिन्न प्रकार के विवरणों को जमा करने पर बल दिया जाता है। जैसे - वार्षिक खाते, आयकर रिर्टन, बिक्रीकर रिर्टन आदि। ये सभी जमा किये जा सकते हैं यदि लेखांकन ठीक से रखा जाए।
- व्यवसाय की सम्पत्तियों की रक्षा करना (Protecting Business Assets) :लेखांकन का एक महत्वपूर्ण कार्य व्यवसाय की सम्पतियों की रक्षा करना है। यह तभी सम्भव है, जबकि विभिन्न सम्पतियों का उचित लेखा रखा जाये।
- निर्णय लेने में सहायता करना (Facilitating Decision Making) :लेखांकन महत्वपूर्ण आँकड़े उपलब्ध कराता है जिससे निर्णयन कार्य में सुविधा होती है।
लेखांकन की विशेषताएँ क्या है ?
लेखांकन की निम्नलिखित विशेषताएँ है :
- लेखांकन व्यवसायिक सौदों के लिखने और वर्गीकृत करने की कला है ।
- विश्लेषण एवं निर्वचन की सूचना उन व्यक्तियों को सम्प्रेषित की जानी चाहिए जिन्हें इनके आधार पर निष्कर्ष या परिणाम निकालने हैं या निर्णय लेने हैं।
- यह सारांश लिखने, विश्लेषण और निर्वचन करने की कला है।
- सौदे मुद्रा में व्यक्त किये जाते हैं।
- ये लेन-देन पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तीय प्रकृति के होते हैं ।
लेखांकन में लेखांकन के विभिन्न कदम (Steps) क्या है ?
लेखांकन के निम्नलिखित कदम (Steps) है :
- आर्थिक घटनाएॅ :- व्यावसायिक संगठनों का सम्बन्ध आर्थिक/वित्तीय घटनाओं से होता है, जिन्हें मुद्रा के रूप में मापा जा सकता है। माल का क्रय, मशीनरी का क्रय, वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री, इत्यादि आर्थिक घटनाएॅ है।
- व्यावसायिक लेन-देनों की पहचान करना :- इसका अभिप्राय यह निर्धारित करना है कि किन लेन-देनों का लेखा किया जाए अर्थात उन घटनाओ की पहचान करना जिनका अभिलेखन किया जाना है।
- लेन-देनों का मापन :- लेखा पुस्तकों में उन्हीं लेन-देनों का अभिलेखन किया जाता है, जिनका मूल्यांकन मुद्रा के रूप में सम्भव है। उदाहरण के लिए, माल की आपूर्ति हेतु आदेश देना, कर्मचारियों की नियुक्ति महत्वपूर्ण घटनाएॅ है, पर इनका लेखा नहीं किया जाता है, क्योंकि ये मुद्रा के रूप में मापनीय नहीं है।
- अभिलेखन :- लेखा-पुस्तकों में वित्तीय स्वभाव के लेन-देनों का लेखा तिथिवार नियमानुसार किया जाता है। अभिलेखन इस प्रकार किया जाता है कि परम्परा के अनुसार इनका सारांश तैयार किया जा सके।
- सम्प्रेषण :- लेखांकन सूचनाओं का उपयोग विभिन्न प्रकार के लोग व संगठन करते है। अतः लेन-देनों का अभिलेखन इस प्रकार किया जाता है एवं सारांश इस प्रकार तैयार किया जाता है कि लेखांकन सूचनाएॅ आन्तरिक एवं बाहय उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकें। लेखांकन सूचना लेखा प्रलेखों के माध्यम से नियमित रूप से सम्प्रेषित की जाती है।
- संगठन :- संगठन से अभिप्राय किसी व्यावसायिक उ़द्यम से है, जिसका उददेश्य लाभ कमाना है या लाभ कमाना नही है।
- सूचना में अभिरूचि रखने वाले उपयोगकर्ता :- लेखांकन सूचना के आधार पर विभिन्न उपयोगकर्ता निर्णय लेते है। सूचनाओं के उपयोगकर्ताओं में निवेशक, लेनदार, बैक, वित्तीय संस्थाएॅ, प्रबन्धक, कर्मचारी आदि उल्लेखनीय है।
सामाजिक लेखांकन (Social Accounting ) क्या है ?
किसी राष्ट्र की आर्थिक क्रियाओं को उचित ढंग से क्रमबद्ध करना ही सामाजिक लेखांकन (Social Accounting ) कहलाता है। ये क्रियाएँ विभिन्न कार्य संबंधी वर्गों में बाँटी जाती हैं। लेखांकन की यह विधि किसी राष्ट्र में निर्धारित अवधि में हुए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों को वृहत रूप में प्रकट करती हैं, इसे राष्ट्रीय लेखांकन भी कहा जाता है।
कर लेखांकन (Tax Accounting) क्या है ?
भारत और अन्य देशों में सरकारी काम-काज के लिए की प्रकार के कर लगाये जाते हैं, जैसे - आयकर, सम्पदा कर, बिक्री कर, उपहार कर, मृत्यु कर आदि।
कर व्यवस्थाओं के लिए विशेष प्रकार की लेखांकन पद्धति अपनायी जाती है। कर व्यवस्थाओं के अनुसार रखे जाने वाले लेखांकन को कर लेखांकन (कर लेखांकन (Tax Accounting)) कहा जाता है।
Bank Overdraft क्या है ?
बैंक से अधिक निकाले गये राशि को Bank Overdraft कहा जाता है। जब कोई खाता शून्य तक पहुंच जाता है तो एक ओवरड्राफ्ट उधार संस्था से क्रेडिट का विस्तार होता है। एक ओवरड्राफ्ट व्यक्ति को धन वापस लेने की अनुमति देता है भले ही खाते में कोई धन न हो या वापसी को कवर करने के लिए पर्याप्त न हो। असल में, ओवरड्राफ्ट का मतलब है कि बैंक ग्राहकों को एक निश्चित राशि उधार लेने की अनुमति देता है।
आपका बैंक अपने ओवरड्राफ्ट को कवर करने के लिए अपने स्वयं के धन का उपयोग करने का विकल्प चुन सकता है। एक और विकल्प ओवरड्राफ्ट को क्रेडिट कार्ड से जोड़ना है। यदि बैंक आपके ओवरड्राफ्ट को कवर करने के लिए अपने स्वयं के धन का उपयोग करता है, तो यह आमतौर पर आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित नहीं करेगा।
ओवरड्राफ्ट सुरक्षा आपको अपने चेकिंग खाते को प्रबंधित करने के लिए एक मूल्यवान टूल प्रदान करती है।
इस तरह हम कह सकते है कि एक बैंक ओवरड्राफ्ट बैंक चालू खाते पर लचीली (Flexible) उधार सुविधा है जो मांग पर चुकाया जा सकता है।
Patent Right क्या है ?
किसी ख़ास वस्तु को बनाने का जो अधिकार प्राप्त हुआ होता है Patent Right कहा जाता है।
Accrued Income क्या है ?
जो आमदनी प्राप्त होना बाकी होता है, उसे Accrued Income (उपार्जित आय ) कहा जाता है।
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