Monday, December 31, 2018

वैश्वीकरण का व्यवसाय तथा उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ा ?

वैश्वीकरण का व्यवसाय तथा उद्योग पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े हैं :-
  • आयात शुल्क में पर्याप्त कमी की गई है।
  • आयात-निर्यात प्रतिबंधों को कम किया गया है।
  • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए द्वार खोल दिए गये हैं।
  • भारत में विदेशी पूंजी का तेजी से आगमन हो रहा है।
  • वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप भारत में विदेशी बैंकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

वैश्वीकरण (Globalisation) क्या है ?

वैश्वीकरण विभिन्न देशों के लोगों, कंपनियों और सरकारों के बीच बातचीत और एकीकरण की प्रक्रिया है। वैश्वीकरण में सम्पूर्ण विश्व को एक बाजार का रूप प्रदान किया जाता है। वैश्वीकरण से आशय विश्व अर्थव्यवस्था में आये खुलेपन, बढ़ती हुई अन्तनिर्भरता तथा आर्थिक एकीकरण के फैलाव से है।
इसके अंतर्गत विश्व बाजारों के मध्य पारस्परिक निर्भरता उत्पन्न होती है तथा व्यवसाय देश की सीमाओं को पार करके विश्वव्यापी रूप धारण कर लेता है । वैश्वीकरण के द्वारा ऐसे प्रयास किये जाते है कि विश्व के सभी देश व्यवसाय एवं उद्योग के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ सहयोग एवं समन्वय स्थापित करें।
वैश्वीकरण में सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव दोनों हैं। एक व्यक्तिगत स्तर पर, वैश्वीकरण जीवन के मानक और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है। व्यवसाय स्तर पर, वैश्वीकरण संगठन के उत्पाद जीवन चक्र और संगठन की बैलेंस शीट को प्रभावित करता है।

वैश्वीकरण की विशेषताएँ क्या है ?

वैश्वीकरण की निम्नलिखित विशेषताएँ है :
  • वैश्वीकरण की ये एक प्रमुख विशेषताएं है की इस के अंतगर्त आर्थिक क्रियाओं का राष्ट्रीय सीमा से आगे विस्तार किया जाता है।
  • वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, तकनीकी तथा श्रम संबंधी अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का एकीकरण हो जाता है अर्थात इनके आवागमन पर सभी प्रकार को रूकावट हटा ली जाती है।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार होता है।
  • वैश्वीकरण राष्ट्रों की राजनीतिक सीमाओं के आर-पार आर्थिक लेन-देन की प्रक्रियाओं और उनके प्रबंधन का प्रवाह है।

निजीकरण का व्यवसाय तथा उद्योग पर क्या प्रभाव (Impact) पड़ा ?

निजीकरण का व्यवसाय तथा उद्योग पर निम्नलिखित कुछ प्रमुख प्रभाव पड़ा :-
  • नवीन आर्थिक नीति के अंतगर्त अब ऋणों की अंशों में परिवर्तनीयता आवश्यक नहीं है ?
  • नवीन आर्थिक नीति के अंतगर्त सरकार निजी क्षेत्र के उद्योगों के विकास एवं विस्तार के लिए सम्भव प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
  • भारत के व्यावसायिक एवं औद्योगिक क्षेत्र में आर्थिक सुधारों के अंतगर्त निजीकरण की प्रकिया अपनाने के कारण निजी क्षेत्र के कुल निवेश में तेजी से वृद्धि हुई है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर उदारीकरण का क्या प्रभाव पड़ा ?

उदारीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर निम्नलिखित कुछ प्रमुख प्रभाव पड़ा है :
  • विकास दर पर प्रभाव पड़ा है
  • उद्योग पर प्रभाव पड़ा है
  • कृषि पर प्रभाव पड़ा है
  • सेवाएं पर प्रभाव पड़ा है
  • शिक्षा क्षेत्र और स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है

निजीकरण (Privatisation)क्या है ?

निजीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे क्षेत्र या उद्योग को सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है।
दूसरे शब्दों में हम इसे ऐसे भी कह सकते है कि निजीकरण से आशय ऐसी औद्योगिक इकाइयों को निजी क्षेत्र में हस्तांतरित किये जाने से है जो अभी तक सरकारी स्वामित्व एवं नियंत्रण में थी।
सार्वजनिक क्षेत्र सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित आर्थिक प्रणाली का हिस्सा है। निजीकरण में सरकारी संपत्तियों की बिक्री या निजी व्यक्तियों और व्यवसायों को किसी दिए गए उद्योग में भाग लेने से रोकने वाले प्रतिबंधों को हटाना भी शामिल हो सकता है।
निजीकरण के समर्थकों का कहना है कि निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा अधिक कुशल प्रथाओं को बढ़ावा देती है, जो अंततः बेहतर सेवा और उत्पाद, कम कीमत और कम भ्रष्टाचार उत्पन्न करती है।
दूसरी तरफ, निजीकरण के आलोचकों का तर्क है कि कुछ सेवाएं - जैसे कि स्वास्थ्य देखभाल, उपयोगिताओं, शिक्षा और कानून प्रवर्तन - सार्वजनिक क्षेत्र में अधिक नियंत्रण सक्षम करने और अधिक न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करने के लिए होना चाहिए।

उदारीकरण का व्यवसाय तथा उद्योग पर क्या प्रभाव (Impact) पड़ता है ?

उदारीकरण के व्यवसाय तथा उद्योग पर निम्नलिखित कुछ प्रमुख प्रभाव पड़ा है :
  • टेक्नोलॉजी आयात से मुक्ति :- उदारीकरण नीति के अंतगर्त उच्चतम प्राथमिकता वाले उद्योगों को विदेशों से टेक्नोलॉजी का आयात करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

  • उद्योगों के विस्तार की स्वतन्त्रता :- उदारीकरण नीति के अंतगर्त विद्यमान उद्योगों को विस्तार के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

  • औद्योगिक लाइसेंसिंग तथा पंजीकरण की समाप्ति :- उदारीकरण नीति के अंतगर्त उद्योगों के पंजीकरण की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। जिसके वजह से 6 उद्योगों को छोड़कर शेष सभी उद्योगों को लाइसेंसिंग से मुक्त कर दिया गया है। 

    ये उद्योग हैं :-
    1. रक्षा उपकरण
    2. शराब
    3. औद्योगिक विस्फोटक
    4. सिगरेट
    5. खतरनाक रसायन
    6. औषधियाँ

  • लघु उद्योगों की निवेश सीमा में वृद्धि :- लघु उद्योगों की निवेश सीमा 1 करोड़ कर दी गई है तथा अति लघु उद्योगों की निवेश सीमा बढ़ाकर 25 लाख रु. कर दी गई है।

  • पूंजीगत माल के आयात की स्वतन्त्रता :- उदारीकरण नीति के अंतगर्त विद्यमान उद्योगों को विदेशों से पूंजीगत माल आयात करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।