लेखांकन Accounts in hindi
Showing posts with label Entrepreneurship (उद्यमिता). Show all posts
Showing posts with label Entrepreneurship (उद्यमिता). Show all posts

आर्थिक विकास (Economic Development) क्या होता है ?

किसी देश के द्वारा अपनी वास्तविक आय को बढ़ाने के लिए सभी उत्पादक साधनों का कुशलतम प्रयोग आर्थिक विकास कहलाता है।
यह एक लगातार या निरंतर चलने वाली प्रक्रिया कारण साधनों की पूर्ति एवं वस्तु संबंधी मांग समय-समय पर बदलती रहती है।
आर्थिक विकास में सामन्य जनता के जीवन-स्तर में सुधार होता है तथा सरकार द्वारा कल्याणकारी कार्यों में वृद्धि की जाती है।
आर्थिक विकास से वास्तविक राष्ट्रीय व प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है।
आर्थिक विकास में वृद्धि आकस्मिक न होकर दीर्घकालीन होनी चाहिए।

भारत में उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के सुधार के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव क्या है ?

भारत में उद्यमिता विकास कार्यक्रमों की कमियों को दूर करने के कई विकल्प हो सकते हैं जिनमे उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को सुचार रूप से चलाना भी है ताकि नये उद्यम पनप सकें, स्वरोजगार की भावना जागृत हो और जिसके फलस्वरूप दूसरों को भी रोजगार मिल सकें।
भारत में उद्यमिता कार्यक्रमों को सुधारने व अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं :

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को चलाने वाली संस्थाओं की समय-समय पर जाँच-पड़ताल होनी चाहिए।

  • सरकार को बड़े नियम बनाकर उन संस्थाओं पर रोक लगानी चाहिए जो मात्र धन कमाने हेतु कागजों पर ही सीमित हैं।

  • शिक्षा पद्धति में बदलाव करते हुए उसे उद्यमिता अधिमुखी बनाया जाना चाहिए। इसके लिए तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं की सख्या बढ़ाने पर बल दिया जाना चाहिए।

  • कर ढांचे को उद्यमियों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम संचालित करने वाली संस्थाओं को सार्थक परियोजनाएं बनाने पर बल देना चाहिए।

  • पिछड़े व ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक बस्तियों का निर्माण करके आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए।

हमारे देश में प्रचलित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में प्रमुख कमियाँ क्या सब है ?

हमारे देश में प्रचलित उद्यमिता विकास कार्यकमों में प्रमुख कमियाँ निम्नलिखित है :
  • उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए भारत में सरकारी सुविधाओं व प्रेरणाओं का आभाव है।

  • भारत में उद्यम में जो शिक्षण व प्रशिक्षण दिया जाता है वो मात्र सैद्धान्तिक होता है व जिसका व्यवहार में ज्यादा महत्व नहीं होता।

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम चलने वाले संसथान गुणवत्ता के स्थान पर उद्यमियों की संख्या बढ़ाने पर बल देते हैं जिससे काबिल उद्यमी तैयार नहीं होते व उद्यम के क्षेत्र में आते ही असफलताओं का सामना करते हैं।

  • भारत में अखिल भारतीय स्तर, राज्य स्तर तथा निजी स्तर पर अनेक संस्थाएँ हैं जिनमें समन्वय की कमी है जिसके फलस्वरूप बहुत-सी क्रियाएं फाइलों तक सीमित रहती हैं।

भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (Entrepreneur Development Institude) क्या है ?

भावी उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह संस्थान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की प्रगति व स्त्रियों में उद्यमिता विकास के लिए कार्यरत है।
उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में यह संस्थान एक विशिष्ट स्थान रखता है।

भारतीय विनियोग केन्द्र (Indian Investment Centre) क्या है ?

भारतीय विनियोग केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित एक संस्था है।
इसका मुख्य कार्य भारतीय उद्यमियों को विदेशी सहयोग बढ़ाने में सहायता करना है तथा दूसरी तरफ विदेशी उद्यमियों को आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करना है।

अखिल भारतीय लघु उद्योग बोर्ड (All India Small Scale Industries Board) क्या है ?

अखिल भारतीय लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों व कार्यक्रमों के बारे में फैसला लेता है।
तो इस प्रकार हम कह सकते है कि यह एक सलाहकार समिति के रूप में कार्य करता है जिसका अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री होता है।
अखिल भारतीय लघु उद्योग बोर्ड की स्थापना 1954 में हुई।

उद्यमिता विकास कार्यक्रम क्यों आवश्यक है ?

किसी भी राष्ट्र चाहे विकसित हो या विकासशील के आर्थिक व औद्योगिक विकास में उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है।
उद्यमिता विकास कार्यक्रम उद्यमियों को विकसित करके उन्हें उद्योग अपनाने के लिए प्रेरित करके एक संगठन स्थापित करने के लिए काबिल बनाता है।
निम्नलिखित कुछ प्रमुख बातें से जिससे यह स्पष्ट होता है किउद्यमिता विकास कार्यक्रम क्यों आवश्यक है :
  • लगातार बढ़ती बरोजगारी ख़ास तौर से अविकसित देशों में एक बहुत बड़ी समस्या है। उदय विकास योजनाएँ लोगों को अपने उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित करती हैं तथा उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सक्षम बनाती हैं। इससे न केवल नए उद्यमियों को रोजगार मिलता है अपितु वे दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम परियोजना के प्रारूप बनाने में सहायता करते हैं। यह कार्यक्रम परियोजना से संबंधित यंत्र एवं सामग्री कच्चा माल, संरचनात्मक सुविधाओं, श्रम स्त्रोत, वित्तीय स्रोत आदि के बारे में आवश्यक सूचना प्रदान करता है।

  • उद्यमिया विकास कार्यक्रम अपने विभिन्न कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षण व प्रशिक्षण देकर सहायता देकर उद्यमियों को स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करने में मदद करती है।

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम उद्यमियों को समय-समय पर तकनीकी बाजार वित्त, सरकारी कार्यक्रमों आदि की सूचनाएँ उपलब्ध कराते है ताकि वे उन सूचनाओं से लाभ उठा सकें।
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम देश व विदेश में नए-नए बाजारों की खोज करने में सहायता करते हैं।

उद्यमिता विकास कार्यक्रम के कुछ मुख्य उदेश्य क्या है ?

उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के उद्देश्य निम्नलिखित है :
  1. उद्यमियों की पहचान करके उन्हें प्रशिक्षण देना।
  2. सही परियोजना से संबंधित पर्यावरण का विश्लेषण करना।
  3. नए उद्यमिता अवसरों का विकास करना।
  4. सरकार से मिलने वाली सहायता और प्रेरणाओं का पता लगाना।
  5. स्वरोजगार की भावना जागृत करना।
  6. उद्यमियों की प्रबन्धकीय क्षमताओं को सुधारना।

उद्यमिता विकास कार्यक्रम क्या है ?

उद्यमिता विकास कार्यक्रम एक व्यापक कार्यक्रम है जो उद्यमियों के विकास पर बल देता है ताकि उद्योग का विकास हो सके।
दूसरे शब्दों में हम इसे ऐसे भी कह सकते है कि उद्यमी विकास योजना एक ऐसी योजना है जो एक उद्यमी की भूमिका को प्रभावशाली बनाने के लिए जो आवश्यक गन चाहिए उन्हें हासिल करने में सहयोग करती है।
यह उद्यमी के औद्योगीकरण का एक अस्त्र है तथा ये उद्यमिता के विकास में आने वाली बाधाओं व समस्याओं का समाधान करता है।
एक उद्यम का विकास उद्यम विकास योजनाओं द्वारा किया जाता है। उद्यम विकास योजनाएँ इस सोच पर आधारित है कि व्यक्तियों का विकास करके उनके दृष्टि कोण को बदला जा सकता है ताकि वह अपने विचारों को एक संगठन की शक्ल दे सकें।

महिला उद्यमियों की कुछ समस्याएं क्या हैं ?

महिला उद्यमियों द्वारा अनुभव की जाने वाली कुछ समस्याएं निम्नलिखित हैं :
  1. महिला उद्यमियों को विशेषकर अपने उत्पादों के विपणन करने में निरंतर बाधाएं उठानी पड़ती है क्योंकि विपणन क्षेत्र में पुरूषों का बाहुल्य है जिसके कारण महिलाएं पर्याप्त अनुभव होने पर भी विशेष स्थान नहीं प्राप्त कर सकती।
  2. महिला उद्यमी को बड़े जोखिम-वहन करने की क्षमता अत्यंत कम होती है क्योंकि वे सुरक्षित जीवन-यापन करने की आदि होती है।
  3. पुरुषों की तरह महिलाएं एक स्थान से दूसरे स्थान तक उतनी आसानी से यात्रा नहीं कर सकती। उन्हें विपणन के संबंध में देर रात बाहर रहने, दूरस्थ स्थानों में जाना अति मुश्किल प्रतीत होता है।
  4. महिला उद्यमी के विकास एवं विस्तार में उच्च उत्पादन लागत भी बाधक होती है।

Women Entrepreneurs (महिला उद्यमी) क्या है ?

महिला उद्यमी से आशय महिला जनसंख्या के उस भाग से है जो औद्योगिक क्रियाओं में साहसिक कार्य में संलग्न। महिला उद्यमी उस उद्यमी को कहा जाता है जो किसी उपक्रम की स्वामी होते हुए उसका नियंत्रण करती है तथा उपक्रम की पूंजी में 51 प्रतिशत का अंश धारण किए हुए है तथा उपक्रम में कार्यरत महिला कर्मचारियों की संख्या न्यूनतम 51 प्रतिशत हो।
अतः एक महिला उद्यमी व्यवसाय को आरम्भ करती है तथा उसका गठन एवं संचालन करती है।
महिला उद्यमियों के अहम योगदान के निम्नलिखित कारण रहे है :
  • वे स्व-विकास के लिए नयी चुनौतियों तथा अवसरों को ज्यादा पसंद करती हैं।
  • वे नव-प्रवर्तक तथा प्रतिस्पर्धी जॉब्स में अपनी योग्यता सिद्ध करना चाहती हैं।
  • वे अपनी घरेलू जिम्मेदारी तथा व्यावसायिक जीवन में संतुलन के द्वारा नियंत्रण को बदलना चाहती हैं।

Women Entrepreneurs (महिला उद्यमी) के लक्षण क्या होती है ?

महिला उद्यमी में जोखिम को वहन करने की दृढ इच्छा शक्ति होती है तथा अपनी योग्यता के द्वारा वह बेहतर पूर्वानुमान, निर्णयन, नियोजन तथा गणना का कार्य कर सकती है।
महिला उद्यमी में मौलिक कल्पना शक्ति होती है। बेहतर कल्पना शक्ति के कारण वह प्रतिस्पर्धी बाजार में नये विचारों तथा अवसरों की बेहतर तलाश कर सकती है तथा सही संगठन के चयन एवं निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
महिला उद्यमी में अपने स्वप्नों को पूरा करने या क्रियान्वित करने की दृढ इच्छा शक्ति होती है।
महिला उद्यमी में कठोर परिश्रम की प्रवृत्ति पायी जाती है। कल्पनाशील विचारों के कारण वह उचित खेल खेल सकती है तथा कठोर परिश्रम की प्रवृत्ति के कारण उद्यम को सफल बना सकती है।

आन्तरिक उद्यमी (Intrapreneur) किसे कहते हैं ?

आंतरिक उद्यमी वह व्यक्ति है जो उद्यमियों के अधीन कार्य करता है तथा उन पर ही आश्रित रहता है।
आंतरिक उद्यमी पूंजी का निर्माण नहीं करता है। यह एक आश्रित व्यक्ति है अतएव इसमें स्वतंत्रता का आभाव होता है।
आंतरिक उद्यमी जोखिम वहन नहीं करता है लेकिन यह नवीन विचारों की उतपत्ति करता है।
आंतरिक उद्यमी व्यवसाय का प्रबंधक होता है। अंतएव स्वयं प्रबंध करता है। इनके अंदर पेशेवर योग्यता का होना आवश्यक है। आंतरिक उद्यमी शब्द की उतपत्ति सबसे पहले अमेरिका में हुई थी।

उद्यमी व्यक्ति का क्या महत्व रहता है ?

जोखिम तथा अनिश्चितता वहां करने के लिए एक साहसी तथा दूरदर्शी व्यक्ति की आवश्यकता पड़ती है जो भूस्वामियों से भूमि और पूंजीपतियों से पूंजी प्राप्त करके श्रमिकों तथा संगठनकर्त्ताओं की सहायता से उत्पादन आरम्भ कर सके। आजकल यह कार्य उद्यमी द्वारा किया जाता है।

वस्तुओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन उद्यमियों के बिना हो ही नहीं सकता। इसलिए विशाल औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तथा संचालन की दृष्टि से उद्यम उत्पादन का अनिवार्य साधन है।

आजकल लोगों की रुचियों और फैशन में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। 
इससे व्यावसायिक क्रियाओं में अनिश्चितता अत्यधिक बढ़ गयी है। उद्यमियों के योग्य तथा जागरूक होने पर ही आधुनिक उपभोक्ताओं की रुचियों के अनुसार वस्तुओं का उत्पादन किया जा सकता है।

किसी भी देश की तीव्र आर्थिक विकास के लिए योग और कुशल उद्यमी का होना आवश्यक होता है।

देश में रोजगार-अवसरों में वृद्धि में भी उद्यमी का होना जरूरी है।

श्रमिक (Labourer) किसे कहते है ?

श्रमिक वो व्यक्ति होते हैं जिसको किसी विशिष्ठ कार्यों के लिए ही नियुक्त किया जाता है।
श्रमिक का कार्य मुख्यतः शारीरिक होता है। यह व्यवसाय का वेतनभोगी कर्मचारी होता है।
श्रमिक को व्यवसाय संबंधी कोई जोखिम नहीं उठाना पड़ता। श्रमिक को व्यवसाय संबंधी कोई जोखिम नहीं उठाना पड़ता।
श्रमिक को उसकी सेवाओं के बदले मजदूरी मिलती है। इनका मजदूरी पूर्व-निश्चित तथा धनात्मक होती है, चाहे व्यवसाय को लाभ हो या हानि।
इनको अपना मजदूरी एक निश्चित अवधि के बाद प्राप्त हो जाती है चाहे माल की बिक्री हुई हो या नहीं।
श्रमिक अधिक गतिशील होता है। वह अपने काम को तथा स्थान को अधिक आसानी से बदल सकता है।

संगठनकर्त्ता (Organiser) किसे कहते है ?

विभिन्न उत्पादनों में अनुकूलतम संयोग व सहयोग स्थापित करने वाले व्यक्ति संगठनकर्त्ता कहलाता है।
संगठनकर्त्ता का कार्य व्यवसाय का कुशलता से संगठन तथा प्रबंध करना है।
संगठनकर्त्ता उद्यमी अथवा व्यावसायिक संस्था का वैतनिक कर्मचारी होता है। संगठनकर्त्ता को अपनी सेवाओं के बदले निश्चित वेतन मिलता है।
संगठनकर्ता को वेतन पूर्व-निर्धारित अवधि के बाद प्राप्त होता है।
यह उद्यमी द्वारा निर्धारित नीतियों के अनुसार कार्य करता है। व्यवसाय में हानि होने पर भी इसे वेतन मिलता है।

पूंजीपति (Capitalist) किसे कहते है ?

पूंजीपति का कार्य केवल पूंजी उधार देना है।
पूंजीपति किसी व्यवसाय में पूंजी प्रदान करता है और इस तरह वह व्यवसाय का ऋणदाता होता है। पूंजीपति को केवल ब्याज मिलता है चाहे व्यवसाय से लाभ हो या हानि।
पूंजीपति को व्यवसाय के लाभ-हानि से कोई संबंध नहीं होता है। उसे तो बस ब्याज सहित अपनी पूंजी लेने का अधिकार होता है।

एक उद्यमी व्यक्ति की क्या विशेषताएँ होती हैं ?

एक उद्यमी की निम्नलखित प्रमुख विशेषताएँ है :
  1. उद्यमी व्यक्ति सदैव जोखिम में ही जीना पसंद करते हैं परन्तु इनके द्वारा लिए गए जोखिम सदैव सुविचारित होते हैं।

  2. उद्यमी केवल साधनों का एकीकरण ही नहीं करता है बल्कि नए उपकरणों की स्थापना भी करता है तथा औद्योगिक क्रियाओं को विस्तृत रूप प्रदान करता है।

  3. उद्यमी आत्म-संतुष्टि को अधिक प्राथमिक उद्देश्य मानते हैं जबकि मौद्रिक लाभों को गौण मानते हैं। उद्यमियों के लिए उनका कार्य ही अपने आप में लक्ष्य एवं संतुष्टि का बड़ा स्त्रोत होता है।

  4. उद्यमी के अंदर सदैव एक सृजनात्मक असंतोष छिपा रहता है जिसके द्वारा वह नए-नए व्यावसायिक अवसरों की खोज करता है तथा उसका विदोहन करके लाभ अर्जित करता है।

  5. उद्यमी अपने उपक्रमों में सदैव नवीन परिवर्तनों एवं सुधारों को जन्म देता है।

  6. उद्यमी व्यक्तियों का स्वभाव स्वतन्त्र प्रकृति का होता है। वे प्रत्येक कार्य को अपने ढंग से करने में ज्यादा विश्वास रखते है।

  7. उद्यमी स्वयं में एक संस्था है क्योंकि यह विभिन्न संस्थाओं को जन्म देता है।

  8. उद्यमी हमेशा कुछ असम्भव प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं तथा समाज में अलग पहचान बनाना चाहते हैं। इसलिए उद्यमी सदैव कठोर परिश्रम एवं दृढ संकल्प के द्वारा उच्च प्राप्तियों में विश्वास रखते हैं।

एक उद्यमी के कार्य क्या सब होता है ?

उद्यमी के निम्नलिखित कार्य हैं :
  1. नव निर्माण :- एक उद्यमी मूल रूप से नई रीति चलाने वाला होता है तथा वह अर्थव्यवस्था में कुछ न कुछ नया ही लाता है।
  2. संगठन तथा प्रबंध : एक उद्यमी को विभिन्न आर्थिक व मानवीय तत्त्वों को संगठित करना व प्रबंध करना होता है।
  3. उत्पादन-इकाई के आकर का निर्धारण : उद्यमी को यह भी निश्चित करना होता है कि उत्पादन-इकाई का आकार क्या होना चाहिए। मांग के कम होने पर उत्पादन-इकाई का आकार छोटा रखना पड़ता है जबकि मांग के अधिक होने पर इकाई का आकार बड़ा रखा जा सकता है।
  4. उत्पादन के पैमाने का निर्धारण : उद्यमी को इस बारे में भी निर्णय लेना पड़ता है कि वस्तु का उत्पादन छोटे पैमाने पर किया जाए अथवा बड़े पैमाने पर किया जाए।
  5. बिक्री की व्यवस्था उद्यमी का कार्य केवल वस्तुओं का उत्पादन करना ही नहीं बल्कि तैयार माल की बिक्री का प्रबंध करना भी है।
  6. सरकार से संबंध : आजकल कुशल उद्यमी का सरकार के सम्पर्क में रहना आवश्यक होता है। इस संबंध में उद्यमी अनेक कार्य करता है जैसे सरकार से लाइसेंस लेना, सरकार को करों का भुगतान करना आदि।

उद्यमी (Entrepreneur) कितने तरह के होते हैं ?

उद्यमी के निम्नलिखित कुछ प्रकार है :
  1. नव-प्रवर्तक उद्यमी : यह वह उद्यमी होते हैं जो अपने व्यवसाय में निरंतर खोज एवं अनुसन्धान करते रहते हैं और इन अनुसंधानों व प्रयोगों के परिणामस्वरूप व्यवसाय में परिवर्तन करके लाभ अर्जित करते हैं।

  2. जागरूक उद्यमी : यह वह उद्यमी होता है जो अनुसंधान व खोज पर कोई धन खर्च नहीं करते हैं। यह सफल उद्यमियों द्वारा किये गए सफल परिवर्तनों को अपनाते हैं।

  3. पूंजी संचय करने वाले उद्यमी : ये उद्यमी पूंजी संचय करने वाले कार्य जैसे कि बैंकिंग व्यवसाय, बीमा कम्पनी आदि में संलग्न होते है।

  4. आदर्श उद्यमी : इस प्रकार के उद्यमी स्वयं के हित के साथ-साथ सामाजिक हित पर भी ध्यान देते हैं। इनका उद्देश्य केवल अधिकतम लाभ कमाना ही नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व को पूरा करना भी है।